Kisse Kahani

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“ज़ुल्फ़िकार” क्या है बाबा??
बेटा… “ज़ुल्फिक़ार” हज़रत अली (रज़िअल्लाहू ताअला अन्हु) की मशहूर तलवार है!
……ये किस क़िस्म को तलवार है बाबा??

#अर्तगल_गाज़ी ने मोहब्बत भरी निगाहों से अपने बेटे #गुन्दोज को मोतवज्जो हुये कहा……देखो बेटा,

#हज़रत_अली बहादुरो के रूहानी रहनुमा हैं और #ज़ुल्फिक़ार उस तलवार का नाम है जो हमारे प्यारे #नबीﷺ ने हज़रत अली को दी थी!

“…..फिर तो ये बहुत ताक़तवर होगी बाबा???” गुंदोज ने गाजी अर्तगल से सवाल किया!

“हां है___” बाबा ने जवाब देते हुये कहा…. “दर हक़ीक़त ये तलवार नज़रो से गुजरी हुई आज तक तमाम दुनिया की सबसे ताक़तवर तलवार है! इसकी एक नोक #इल्म की नुमाइंदगी करती है और दुसरी नोक #इंसाफ़ की !_____इस तरह मुसलमान की तलवार ‘इल्म’ और ‘इन्साफ़’ उठाये होती है…. और मुसलमान जिस जगह को फतेह करता है वहां ‘इल्म’ और ‘इन्साफ़’ लाता है!”

बेटा! जंग से पहले हम इसिलिए ये दुआ करते हैं….
“या अल्लाह हमारी तलवारे ज़ुल्फीक़ार की तरह हों”
“जहां हम जायें वहां ‘इल्म’ और ‘इन्साफ़’ लाना नसीब हो!”

मंजिले मार रे शर रफ्तारो की कसम
कोसो दौड़ते, सूमो की चिंगारियों की कसम
अपनी नामुझ के खातिर
असलाफ़ के खातिर
किसी जंग में पीठ दिखाने का सोचु भी अगर,
खुदा मुझे जंजीरों से नेस्तोनाबूद कर दे
मुझे सीना ई अर्ज पर कंही पनाह न मिले
तारीख के वक़्त से मेरा नाम हमेशा के लिए मिट जाए
अपने अजीम आबा औ अजदाद के नाम से
अपने कबीले के नाम से, मुझे ताक़बर कोई न पहचाने।
रब्बे जलजलाल हर फ़ारके में फतह मर फरमाए।
#अर्तगल_गाज़ी

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