Kisse Kahani

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Adam A.S. Ka Waqya

 

 

            Kisse Kahani के सिलसिले में आज Episode-*03* है, जिसमे हम Adam A.S. Ka Waqya का ज़िक्र करेंगे । और जानेगे कि हज़रते आदम अ.स. को अबुल बशर क्यूँ कहा गया।

          हज़रते Adam A.S. सबसे पहले बशर हैं, यानि सबसे पहले इंसान हैं, जिसे इंसानी सूरत में बनाया गया, इससे पहले इंसानी जिस्म में किसी को नहीं बनाया गया।

          और इसीलिए हज़रते Adam A.S. को अबुल बशर भी कहा जाता है। यानि इंसानो के बाप, जो हज़रते आदम अ.स. हैं।

 

          और इसीलिए हज़रते Adam A.S. को अबुल बशर भी कहा जाता है। यानि इंसानो के बाप, जो हज़रते आदम अ.स. हैं।

 

 

 

          जब अल्लाह ता’ला ने हज़रते Adam A.S. को पैदा करने का इरादा फरमाया तो अल्लाह ता’ला ने फरिश्तों से मशवरा किया।

 

 

 

          अल्लाह ता’ला ने फरमाया – कि ज़मीन पे मैं अपना खलीफा बनाना चाहता हूँ। ( इसलिए हज़रते Adam A.S. को  ख़लीफतुल्ला  यानि अल्लाह का खलीफा भी कहा जाता है।)

 

 

 

          तो फरिश्तों ने फरमाया – कि अए हमारे रब क्या तू ऐंसे को ख़लीफ़ा बनाएगा जो ज़मीन पे फसाद फैलाएं और खून रेज़ियाँ करेगा। हम तो फरिश्ते हैं हम तेरी इबादत करते हैं। और ख़लीफा बनने के तो हम हक़दार हैं।

 

 

 

          मगर अल्लाह ने फरमाया – अए मेरे फरिश्तों बेशक मैं वो जानता हूँ जो तुम नहीं जानते हो।

 

 

 

          जब अल्लाह ता’ला ने हज़रते Adam A.S. को बनाया तो मिट्टी से बनाया और वो मिट्टी भी कमाल की मिट्टी थी, जिसे पूरी दुनिया से हज़रते इज़राइल अ.स. को भेजकर एक मुट्ठी मिट्टी मंगवाई गई।            

          जिसमें पूरी दुनिया की मिट्टी के ज़ायके भी थे, और रंग भी थे। यानि काली, सफ़ैद, शुर्ख़, सिया, और मीठी, कड़वी, तुर्श सभी तरह की मिट्टी जमा हो गई।

           जिसकी वजह से आज पूरी दुनिया में सभी रंग के लोग मिलते हैं और उनके मिजाज़ भी अलग-अलग होते हैं।

 

           जिसमें पूरी दुनिया की मिट्टी के ज़ायके भी थे, और रंग भी थे। यानि काली, सफ़ैद, शुर्ख़, सिया, और मीठी, कड़वी, तुर्श सभी तरह की मिट्टी जमा हो गई।

           जिसकी वजह से आज पूरी दुनिया में सभी रंग के लोग मिलते हैं और उनके मिजाज़ भी अलग-अलग होते हैं।

 

 

 

          जब हज़रते Adam A.S. का मिट्टी का पुतला बन गया तो उसे जन्नत के दरवाजे पर रख दिया। फ़रिश्ते देखकर ताज्जुब करते थे क्योंकि इंसानों की शक़्लो-सूरत फरिश्तों जैंसी नहीं थी।

 

 

 

          इसके बाद अल्लाह ता’ला ने रूह डालने का हुक़्म दिया। जब हज़रते आदम अ.स. में रूह दाख़िल हुई तो सबसे पहले रूह नाक में पहुंची, तो आपको छींक आई और रूह उसके बाद जब ज़बान पर पहुंची।

           यानि छींक आने के बाद हज़रते आदम अ.स. की ज़बान से जो पहला जुमला निकला वो था-

          “अल्हम्दोलिल्लाह” इसीलिए हम छींकने के बाद अल्हम्दोलिल्लाह कहते हैं, और सुनने वाला जवाब देता है- “यरहमकोअल्लाह”।

 

           यानि छींक आने के बाद हज़रते आदम अ.स. की ज़बान से जो पहला जुमला निकला वो था-

          “अल्हम्दोलिल्लाह” इसीलिए हम छींकने के बाद अल्हम्दोलिल्लाह कहते हैं, और सुनने वाला जवाब देता है- “यरहमकोअल्लाह”।

 

 

 

          मज़े को बात यह है, कि जब हज़रते आदम अ.स. ने अल्हम्दोलिल्लाह कहा तो कोई जवाब देने वाला तो था नहीं तो अल्लाह ता’ला ने यरहमकोअल्लाह कहा।

 

 

 

          अब फरिश्तों को हुक़्म दिया गया, किहज़रते आदम अ.स. को सजदा करें….          

         

          अच्छा इसके पहले फरिश्तों ने अल्लाह से कहा था कि फ़रिश्ते ज़मीन पर अल्लाह के खलीफा बनने के हक़दार हैं। और अल्लाह ने कहा था बेशक मैं वो जनता हूँ, जो तुम नहीं जानते हो।

          तो अल्लाह ने हज़रते आदम अ.स. को सारा इल्म अता फरमाया मिसाल के तौर पर हज़रते आदम अ.स. को 7 लाख ज़बाने (Language) का इल्म था।

 

          अच्छा इसके पहले फरिश्तों ने अल्लाह से कहा था कि फ़रिश्ते ज़मीन पर अल्लाह के खलीफा बनने के हक़दार हैं। और अल्लाह ने कहा था बेशक मैं वो जनता हूँ, जो तुम नहीं जानते हो।

          तो अल्लाह ने हज़रते आदम अ.स. को सारा इल्म अता फरमाया मिसाल के तौर पर हज़रते आदम अ.स. को 7 लाख ज़बाने (Language) का इल्म था।

 

 

 

          तो अब अल्लाह ने फरिश्तों से चीज़ों के बारे में पूंछा तो फ़रिश्तों ने कहा या अल्लाह हम तो सिर्फ वही जानते हैं, जो तूने हमें बताया।

            और जब हज़रते आदम अ.स. से पूंछा तो आपने सब बता दिया, तो फ़रिश्तों को अहसास हो गया कि हज़रते आदम अ.स. इल्म में हमसे आगे हैं।

           और फिर फ़रिश्तों को हुक़्म दिया गया, कि सजदा क्यों किया जाए।

 

           और जब हज़रते आदम अ.स. से पूंछा तो आपने सब बता दिया, तो फ़रिश्तों को अहसास हो गया कि हज़रते आदम अ.स. इल्म में हमसे आगे हैं।

           और फिर फ़रिश्तों को हुक़्म दिया गया, कि सजदा क्यों किया जाए।

 

 

 

          इसके बाद का वाक़या सभी जानते हैं, कि इब्लीस ने सजदा करने को मना किया और उसका हश्र सभी जानते हैं।

 

 

 

          हज़रते आदम अ.स. के बाद दूसरी हस्थी बीबी हव्वा र.अ. दुनिया में तशरीफ़ लाईं, जो हज़रते आदम अ.स. की पसली से पैदा हुईं।

 

 

 

          हज़रते आदम अ.स. ने 960 साल की उमर पाई। और जब आपने दुनिया से पर्दा फरमाया तो आपकी औलाद की तादाद दुनिया में 1लाख हो चुकी थी।

Taboot-E-Sakina

Mar ke zinda hona

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