Kisse Kahani

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           * Taboot-E-Sakina *

Kisse kahani के सिलसिले में आज हमारा Episode-*01* है, जिसमे हम क़ुरान के वाक़यों का ज़िक्र करेंगे।

आज हम बात करेंगे एक बड़े ही अजेबोग़रीब ताबूत की, जिसका जिक्र क़ुरान में मौजूद है , और जिसे ताबूत-ए-सकीना कहते है।

ताबूत-ए-सकीना, यह शमशाद की लकड़ी का एक सन्दूक है।

जो हज़रत आदम अ. स. पर नाज़िल हुआ था । और आपकी आखरी ज़िन्दगी तक आपके पास रहा। फिर बतौर-ए-मीरास बारी-बारी आपकी औलादों को मिलता रहा। यह तक कि ये हज़रत याकूब अ.स. को मिला और आपके बाद आपकी औलाद बनी इसराईल के कब्जे में रहा। और हज़रत मूसा अ. स. को मिला जिसमे आप तौरेत शरीफ और खास खास समान रखने लगे। ये बड़ा ही मुक़द्दस और बाबरकत सन्दूक था।

बनी इसराईल जब कुफ्फरों के लश्कर की कसरत और शौकत देख कर सहम जाते थे, डर जाते थे, और उनके सीनों में दिल धड़कने लगते थे, तो वे इस सन्दूक को अपने आगे रख लेते थे। तो उस सन्दूक से ऐसी रहमतों और बरकतों का ज़हूर होता था, कि दिलों में सुकून और इत्मिनान पैदा हो जाता था।

लरसते हुए दिल पत्थर की चट्टान से भी ज़्यादा मजबूत हो जाते थे।

और जिस कदर सन्दूक आगे बढ़ता था , आसमान से “नसरूम मिनल्लाहि व फतहुन करीब” की बशारते-उज़्मा नाज़िल हुआ करती थी, और फतहे मुबीन हासिल हो जाया करती थी।

बनी इसराईल में जब कोई इख़्तलाफ़ (मतभेद) पैदा हुआ करेगा था, तो इसी सन्दूक से फैसला करवाया करते थे। सन्दूक से फैसले की आवाज़ और फतह की बिशारत (अच्छी खबर) सुनी जाती थी।

बनी इसराईल इस सन्दूक को अपने आगे रखकर और इसके वसीले से दुआएँ माँगा करते थे। तो उनकी दुआएँ कुबूल हो जाती थी। और बलाओं की मुसीबतें और वबाओं की आफतें टल जाती थी।

अलगरज़ यह सन्दूक बनी इसराईल के लिए ताबूत-ए-सकीना यानी बरकतों-रहमत का खज़ीना और नुसरते ख़ुदाबन्दी के नुज़ूल का निहायत और मुक़द्दस और बेहतरीन ज़रिया बन गया था।

मगर जब बनी इसराईल तरह तरह के गुनाहों में मुब्तिला हो गए, और लोगों में गुनाहों की सरकशी का दौर दौरा हो गया।

तो इनकी बदआमालियों की नहूसत की वजह से अल्लाह की तरफ से गज़ब नाज़िल हुआ, कि क़ौमे अमालका के कुफ्फार ने एक लश्करे जर्रार के साथ इन लोगों पर हमला कर दिया।इन गैर मुस्लिमों ने बनी इसराईल की बस्तियों को तहस नहस कर डाला । और इस सन्दूक को भी उठा कर ले गए। इस मुक़द्दस तबर्रुक को नजासतों के कूड़ेदान में फेंक दिया , लेकिन इस बेअदबी का क़ौमे अमालका पर ये बवाल पड़ा , की ये लोग तरह तरह की बलाओं और बीमारियों में झंजोड़ दिए गए।

चुनांचे क़ौमे अमालका के 05 शहर बर्बाद और बीरान हो गए ।

यहां तक इन्हें यह यक़ीन हो गया कि सन्दूक की बेअदबी का अज़ाब हम पर पड़ गया है।और इन क़ाफिरों की आंखें खुल गईं। और इन लोगों ने इस मुक़द्दस सन्दूक को एक बैलगाड़ी में लाद कर बनी इसराईल की बस्तियों की तरफ रवाना कर दिया।

फिर अल्लाह ताला ने 04 फरिश्तों को मुकर्रर फार्म दिया , जो इस सन्दूक को बनी इसराईल के नबी हज़रत शमबील अ. स. की खिदमत में लाए। इस तरह बनी इसराईल की खोई हुई नेअमत दोबारा उन्हें मिल गई। और यह सन्दूक हज़रत शमबील अ. स. के पास ठीक उस वक़्त पहुंचा जब हज़रत शमबील अ. स. ने तालुत को बादशाह बनाया, और बनी इसराईल तालुत की बादशाही कुबूल करने को तैयार नही थे। और यही शर्त ठहरी थी कि मुक़द्दस सन्दूक आ जाए तो हम तालुत की बादशाही कुबूल करेंगे।

चुनांचे ताबूत आ गया और बनी इसराईल तालूत की बादशाही पर रज़ामंद हो गए।

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस सन्दूक में ऐंसा क्या था कि ये इतना मुबारक है, और इसका जिक्र क़ुरान में किया गया है।

इस मुक़द्दस सन्दूक में हज़रते मूसा अ. स. का असा और आपकी मुबारक जूतियाँ थी, हज़रते हारून अ. स. का अमामा , हज़रते सुलेमान अ. स. की अंगूठी, तौरेत की तख्तियों के चंद टुकड़े , कुछ मनो-सलवा , और इसके अलावा अम्बियाए किराम के सूरतों के हुलिए बग़ैरह, ये सब सामान मौजूद थे।

क़ुरआने मजीद में इस सन्दूक का ज़िक्र पारा 02 सूरह बकरा, आयात नंबर 248 में होता है।

* इस वाक़ये से हमे क्या सबक मिलता है*

-: हमे यह मालूम हुआ कि बुज़ुर्गों के तबर्रुकात की खुदाबंदे कुद्दूस के दरबार मे बड़ी इज़्ज़ातों-अज़मत है। और उनके ज़रिये मखलूके खुदा को बड़ी रहमतों-बरकत हासिल होती है।

-: और दूसरी बात यह सीखने को मिलती है कि जिस सन्दूक में अल्लाह वालों के मुबारक लिबास, असा, जूतियां, अंगूठी हों उस पर इत्मिनान का सकीना और अनवरो-बरकात के खज़ीना खुद की तरफ से उतरना क़ुरान से साबित है, तो भला जिस कब्र में इन बुज़ुर्गों का पूरा जिस्म-ए-मुबारक रखा होगा , तो उन कब्रों पर रहमतो-बरकत का इत्मिनान का सकीना क्या नहीं उतरता होगा।

हर आकिल इंसान जिसको खुदाबन्दे आलम ने बसारत के साथ साथ इमानी बसीरत भी हासिल फरमाई है, वह इस बात पर ज़रूर ईमान लाएगा।

तो साबित हो गया कि जो मुसलमान इन बुज़ुर्गों की कब्रों पर अच्छी नियतों के साथ हाजिरी देंगे, वे ज़रूर अल्लाह ताला की रहमतों और बरकतों की दौलत से मालामाल होंगे।

-: और यह भी सीखने को मिला कि जो लोग बुज़ुर्गों की कब्रों की बेअदबी करेगे, वे अल्लाह के गज़बे जब्बार में गिरफ्तार होंगे।

Nazar

 

 

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